क्रिकेट की वैश्विक करेंसी बना भारत: BCCI की नेटवर्थ ₹18,760 करोड़, दुनिया के बाकी 9 बोर्ड मिलकर भी 6 गुना पीछे; ICC का पूरा पहिया भारत पर निर्भर
मुंबई: विश्व क्रिकेट के पटल पर आज भारत सिर्फ एक टीम नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक क्रिकेट अर्थव्यवस्था की धड़कन और करेंसी बन चुका है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की वित्तीय ताकत के सामने दुनिया का कोई भी क्रिकेट बोर्ड टिकता नजर नहीं आ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, अकेले BCCI की अनुमानित नेटवर्थ ₹18,760 करोड़ तक पहुंच चुकी है। वहीं दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और पाकिस्तान समेत दुनिया के शीर्ष 9 प्रमुख क्रिकेट बोर्डों की कुल संयुक्त नेटवर्थ महज ₹3,113 करोड़ है। यानी भारतीय बोर्ड बाकी सभी को मिलाकर भी लगभग 6 गुना बड़ा है, जबकि दूसरे नंबर पर मौजूद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (₹658 करोड़) से बीसीसीआई 28 गुना अधिक मजबूत है।
ICC की कमाई की रीढ़ बना भारत
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) का पूरा वित्तीय ढांचा भारत के इर्द-गिर्द घूमता है। आईसीसी के कुल राजस्व में अकेले भारत की हिस्सेदारी 38.50% है, जबकि इंग्लैंड (6.89%) और ऑस्ट्रेलिया (6.25%) काफी पीछे हैं। 2023 वनडे वर्ल्ड कप से ICC को जो ₹5,900 करोड़ की कमाई हुई थी, वह उस पूरे साल की वैश्विक कमाई का 86% हिस्सा थी।
भारत से खेले तो मुनाफा, नहीं खेले तो घाटा
ग्लोबल क्रिकेट की कड़वी सच्चाई यह है कि ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड को छोड़ दें तो जिम्बाब्वे, श्रीलंका, वेस्टइंडीज, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड जैसे बोर्ड भारतीय दौरों और ब्रॉडकास्ट कमाई के भरोसे ही अपनी वित्तीय सांसें ले रहे हैं:
-
न्यूजीलैंड: हाल ही में ₹41.5 करोड़ के घाटे से जूझ रहा न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड भारत के 40 दिनों के दौरे (2 टेस्ट, 5 वनडे, 5 टी20) के दम पर ₹57 करोड़ के मुनाफे में बदल सकता है।
-
जिम्बाब्वे व दक्षिण अफ्रीका: जिम्बाब्वे को एक भारतीय सीरीज से ₹36 करोड़ का शुद्ध लाभ हुआ जिससे उसका पूरा कर्ज उतर गया। वहीं, भारत दौरे के बाद दक्षिण अफ्रीका बोर्ड ₹145 करोड़ के घाटे से निकलकर ₹373 करोड़ के रिकॉर्ड मुनाफे में आ गया था।
बाजार के साथ-साथ आईसीसी चेयरमैन जय शाह और प्रशासनिक कमेटियों में भारतीय दिग्गजों की मौजूदगी से अब क्रिकेट के मैदान से लेकर पावर कॉरिडोर तक भारत का एकछत्र राज स्थापित हो चुका है।